*किड्डू प्ले स्कूल केकड़ी में हर्षोल्लास से मनाया गया डांडिया व विजयादशमी उत्सव**पर्यावरण संरक्षण का दिया संदेश: जन्मदिन पर केक की जगह लगाया पौधा*

केकड़ी 18 अक्टूबर (ब्यूरो )*
*शहर के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान किड्डू प्ले स्कूल, केकड़ी में शारदीय नवरात्रि के पावन अवसर पर 17 अक्टूबर को भव्य ‘डांडिया उत्सव’ एवं* *विजयादशमी उत्सव’ का आयोजन अत्यंत हर्षोल्लास एवं धूमधाम से किया गया।*
*कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में इशिका साहू एवं सूरज साहू उपस्थित रहे। विद्यालय परिवार की ओर से अतिथियों का भावभीना स्वागत किया गया।* *मुख्य अतिथियों ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए नवरात्रि व विजयादशमी पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं दीं और बच्चों को अपनी संस्कृति तथा उच्च नैतिक मूल्यों को अपनाने के लिए प्रेरित किया।*
*रंगरंगी पोशाकों में थिरके नन्हे-मुन्ने बच्चे*
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*उत्सव के दौरान पारंपरिक एवं रंग-बिरंगी पोशाकों में सजे-धजे विद्यार्थियों ने डांडिया एवं गरबा की शानदार प्रस्तुतियां दीं। बच्चों के उत्साह और ऊर्जा ने पूरे माहौल को भक्तिमय एवं उल्लासपूर्ण बना दिया।*
*प्रतियोगिता परिणाम एवं पुरस्कार वितरण*
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*कार्यक्रम में आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं में बच्चों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया।*
*ड्रेस कोड प्रतियोगिता: अनु चौधरी एवं मयंक मेघवंशी ने प्रथम स्थान प्राप्त किया।*
*डांडिया नृत्य प्रतियोगिता:-*
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*गुंजन मेघवंशी ने प्रथम स्थान एवं वाणी जैन ने द्वितीय पुरस्कार प्राप्त किया।*
*साथ ही कार्यक्रम में भगवान राम, लक्ष्मण, माता सीता एवं हनुमान जी की मनमोहक भूमिका निभाने वाले नन्हे बाल कलाकारों को भी मुख्य अतिथियों द्वारा पुरस्कृत कर उनका उत्साहवर्धन किया गया।*
*पर्यावरण संरक्षण की अनूठी पहल*
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*कार्यक्रम में विजयादशमी के साथ-साथ एक विशेष संदेश भी दिया गया। विद्यालय के विद्यार्थी का जन्मदिन मनाते हुए यह दर्शाया गया कि जन्मदिन जैसे खास अवसरों पर केवल केक काटने के बजाय पौधरोपण करना हमारे पर्यावरण को स्वच्छ, हरा-भरा और सुरक्षित बनाने के लिए अत्यंत आवश्यक है। इस पहल की सभी ने मुक्त कंठ से सराहना की।*
*निदेशक व प्रधानाचार्या का संदेश एवं रावण दहन*
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*“विद्यालय के डायरेक्टर लोकेश अहीर एवं प्रिंसिपल श्रीमती रेखा ग्वाला ने सभी बच्चों एवं अभिभावकों को नवरात्रि व दशहरे की बधाई दी। उन्होंने कहा कि ऐसे सांस्कृतिक आयोजनों से बच्चों में अपनी संस्कृति के प्रति जुड़ाव और सम्मान की भावना जागृत होती है।”*
*कार्यक्रम के अंत में प्रतीकात्मक रावण दहन के साथ असत्य पर सत्य की विजय के संदेश के साथ इस भव्य उत्सव का समापन किया गया।*














