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बिजयनगर मे मुमुक्षु शुभम श्रीश्रीमाल का भावभीना अभिनंदन: गोद भराई व शॉल ओढ़ाकर किया बहुमान**सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने मोहा मन*

बिजयनगर, 29 जुलाई: मुमुक्षु शुभम श्रीश्रीमाल ने कहा कि सांसारिक मोहमाया व भौतिकता के आकर्षण से मुक्त होने का एकमात्र साधन संयम का मार्ग है।* *बिना संयम को धारण किए मुक्ति की राह पर आगे नहीं बढ़ा जा सकता। वे महाराजा पैलेस में लुणावत परिवार की ओर से आयोजित दीक्षार्थी अभिनन्दन समारोह में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि सांसारिक बंधनों और चकाचौंध से मुक्ति केवल आत्म-नियंत्रण व संयम से ही संभव है। यह संसार क्षणभंगुर व असार है और इससे पार पाने के लिए संयममयी जीवन शैली अपनाना ही एकमात्र साधन है। समारोह के दौरान ज्ञानचंद लुणावत, लालचंद लुणावत, महावीर लुणावत, सुनील लुणावत, मंथन लुणावत, दक्ष लुणावत, नक्ष लुणावत सहित लुणावत परिवार के सदस्यों ने मुमुक्षु शुभम श्रीश्रीमाल एवं उनके माता-पिता पुष्पा देवी व प्रदीप श्रीश्रीमाल का शॉल ओढ़ाकर एवं गोद भराई की रस्म कर भावभीना अभिनन्दन किया। समारोह की शुरूआत में लुणावत परिवार की महिलाओं ने मंगलाचरण नृत्य व स्वागत गीत प्रस्तुत किया। इस दौरान अभिज्ञा जैन, साक्षी पीपाड़ा केकड़ी, शीलू लुणावत, माणक चंद मंडिया, सतीश लुणावत सहित अन्य ने विचार व्यक्त किए। नीतू छाजेड़ व वाणी मोदी ने वैराग्य गीत प्रस्तुत किया। राधिका लुणावत, वर्षा लुणावत, टीना लुणावत, सुनीता नाबेड़ा सहित परिवार की अन्य महिलाओं ने आकर्षक वैराग्य नृत्य प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का प्रभावी संचालन केकड़ी निवासी नीरज लोढ़ा ने किया। गौरतलब है कि मुमुक्षु शुभम श्रीश्रीमाल शिखरानी हाल बिजयनगर निवासी स्वर्गीय हरकचंद लुणावत की मंझली पुत्री पुष्पा श्रीश्रीमाल (धर्मपत्नी प्रदीप श्रीश्रीमाल) के सुपुत्र हैं। इस मौके पर शिवराज लुणावत, मुकेश लुणावत, पवन लुणावत, चेतन लुणावत, सौरभ लुणावत, ज्ञानचंद नाबेड़ा, विभोर रांका मसूदा, शशांक लोढ़ा जयपुर, आशीष पोखरणा, ज्ञानचंद संचेती अजमेर, कुशल संचेती अजमेर, धर्मीचंद लोढ़ा राममालिया, महावीर नाबेड़ा, आदित्य लोढ़ा केकड़ी, जितेन्द्र छाजेड़, सज्जन छाजेड़, महावीर पामेचा, राजेश खाब्या, संजय बड़ोला, सुखराज मंडिया सहित समाज के कई प्रबुद्धजन मौजूद रहे।*
*सुख-वैभव छोड़ संयम पथ की ओर मुड़े कदम: ब्यावर हाल पाली निवासी पुष्पा व प्रदीप श्रीश्रीमाल के 30 वर्षीय सुपुत्र शुभम श्रीश्रीमाल आगामी 4 सितंबर 2026 को बीकानेर में जैन आचार्य श्री रामलाल महाराज व उपाध्याय श्री राजेश मुनि के पावन सानिध्य में जैन भागवती दीक्षा ग्रहण करेंगे। 18 सितंबर 1995 को जन्मे शुभम ने पटियाला से इंजीनियरिंग करने के बाद बेंगलुरु की एक प्रतिष्ठित कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में कार्य किया। हालांकि, इस कॉर्पोरेट लाइफस्टाइल के बीच भी उनका मन हमेशा धर्म, साधना व आत्म-कल्याण की राह तलाशता रहा। जून 2025 में आचार्य श्री रामलाल महाराज के सानिध्य में आयोजित ‘उन्नयन शिविर’ के प्रवचनों से प्रेरित होकर शुभम के मन में तीव्र वैराग्य जागृत हुआ। उन्होंने जीवन भर शील व्रत पालन करने का संकल्प लिया और अंततः अपनी नौकरी से इस्तीफा दे दिया।शुभम के बड़े भाई अंकित श्रीश्रीमाल ने बताया कि शुरुआती असमंजस के बाद शुभम की अटूट श्रद्धा व दृढ़ निश्चय को देखकर परिवार ने सहर्ष दीक्षा की अनुमति दे दी।* *गत 9 जुलाई 2026 को माता-पिता ने गुरुदेव को दीक्षा का आज्ञा पत्र समर्पित किया। शुभम इसे पूर्व जन्म के संस्कारों व गुरु कृपा का फल मानते हुए संयम पथ पर आगे बढ़ रहे हैं।*

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