*मोक्ष के लिए ज्ञान से अधिक जरूरी है चारित्र: मुनि प्रज्ञान सागर।*

*सावर में अग्रवाल जेन पंचायत भवन में जेन मुनि ने धर्म सभा में दिया धर्म उपदेश।*
*सावर(जे टी यू )*
*मुनि प्रज्ञान सागर जी महाराज ने कहा कि मोक्ष की प्राप्ति के लिए केवल ज्ञान ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि इसके लिए श्रेष्ठ चरित्र और अच्छा आचरण आवश्यक है। उन्होंने कहा कि कई लोग मानते हैं कि मोक्ष प्राप्त करने के लिए ज्ञान की आवश्यकता होती है, जबकि वास्तव में जीवन में अच्छे विचारों के साथ उत्तम आचरण का होना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।*
*मुनि श्री ने कहा कि भले ही किसी व्यक्ति के पास अधिक ज्ञान न हो, लेकिन उसका आचरण सदैव अच्छा होना चाहिए। व्यक्ति को कैसे बोलना, चलना, उठना, बैठना और सोना है, इन सभी बातों का ध्यान रखते हुए अपनी दिनचर्या को व्यवस्थित रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि व्यक्ति की वास्तविक कीमत उसके अच्छे आचरण से होती है।*
*उन्होंने कहा कि कई बार अत्यधिक पढ़े-लिखे लोगों को भी अनपढ़ों जैसा व्यवहार करते हुए देखा जाता है। वहीं कम पढ़े-लिखे व्यक्ति अपने उत्तम आचरण से समाज में सम्मान प्राप्त करते हैं। इसलिए शिक्षा के साथ संस्कार और चारित्र का होना आवश्यक है।*
*मुनि श्री ने कहा कि यदि जीवन में सफलता प्राप्त करनी है। तो व्यक्ति को अपनी काया और मन पर नियंत्रण रखना चाहिए।* *परिस्थितियां कैसी भी हों, आगे बढ़ने के लिए क्रोध, अहंकार और अन्य बुरी आदतों से दूर रहना जरूरी है। छोटी-सी गलती भी वर्षों की मेहनत और प्रतिष्ठा पर पानी फेर सकती है।* *इसलिए व्यक्ति को हर समय अपने आचरण और व्यवहार के प्रति सजग रहना चाहिए।*
*उन्होंने कहा कि जीवन में वही मार्ग श्रेयस्कर है, जो व्यक्ति को सदाचार, संयम और आत्मनियंत्रण की ओर ले जाए। अच्छे विचारों के साथ श्रेष्ठ आचरण अपनाकर ही मनुष्य अपने जीवन को सार्थक बना सकता है।*







