
*केकड़ी,(क्राइम ब्यूरो )*
*अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट संख्या-01, केकड़ी, श्री आशीष बैंाड़ा (आर.जे.एस.) ने चेक अनादरण के मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए अभियुक्त रामनारायण तेली पुत्र लाधुराम, निवासी ग्राम भराई, तहसील केकड़ी, जिला अजमेर को परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 की धारा 138 के तहत दोषसिद्ध किया है।*
*न्यायालय ने अभियुक्त को 02 वर्ष के साधारण कारावास की सजा सुनाने के साथ ही दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा 357(3) के तहत ₹10,00,000/- प्रतिकर के रूप में परिवादी दिनेश कुमार को अदा करने का आदेश दिया है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि प्रतिकर की राशि का भुगतान नहीं करने पर अभियुक्त को 30 दिन का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।*
*₹7.50 लाख का चेक हुआ था अनादरित*
*प्रकरण के अनुसार परिवादी दिनेश कुमार जैन ने न्यायालय में परिवाद प्रस्तुत कर बताया था कि अभियुक्त से आपसी जान-पहचान होने के कारण उसने घरेलू एवं पारिवारिक आवश्यकता के लिए ₹7,50,000/- उधार दिए थे। उक्त राशि की अदायगी के लिए अभियुक्त ने चेक संख्या 922477 दिनांक 06.03.2020, राशि ₹7,50,000/- का चेक दिया था।*
*चेक को बैंक में भुगतान हेतु प्रस्तुत करने पर वह अपर्याप्त निधि (Insufficient Funds) के कारण अनादरित हो गया। इसके बाद परिवादी की ओर से अभियुक्त को दिनांक 18.03.2020 को विधिक नोटिस भेजा गया, लेकिन निर्धारित अवधि में चेक राशि का भुगतान नहीं किया गया।*
*न्यायालय ने धारा 118 एवं 139 की उपधारणाओं को माना लागू*सुनवाई के दौरान अभियुक्त की* *ओर से चेक के दुरुपयोग* *सिक्योरिटी चेक होने, लेन-देन के संबंध में संदेह तथा परिवादी की आर्थिक क्षमता सहित विभिन्न तर्क प्रस्तुत किए गए।* *बचाव पक्ष की ओर से बातचीत की ट्रांसक्रिप्ट एवं पेन ड्राइव भी प्रस्तुत की गई।*
*न्यायालय ने साक्ष्यों का विश्लेषण करते हुए माना कि अभियुक्त ने चेक पर अपने हस्ताक्षर होने से इनकार नहीं किया तथा बचाव पक्ष यह साबित करने में असफल रहा कि चेक का दुरुपयोग किया गया था अथवा चेक के पीछे कोई वैध देनदारी नहीं थी।*
*न्यायालय ने सुप्रीम कोर्ट के रंगप्पा बनाम श्रीमोहन, AIR 2010 SC 1898 के निर्णय का उल्लेख करते हुए कहा कि धारा 139 के तहत चेक धारक के पक्ष में उपधारणा बनती है और उसे खंडित करने का भार अभियुक्त पर होता है। न्यायालय ने माना कि अभियुक्त उक्त वैधानिक उपधारणा को संभावनाओं के प्रबल आधार पर भी प्रभावी रूप से खंडित नहीं कर पाया।*
*सिक्योरिटी चेक का बचाव स्वीकार नहीं*
*न्यायालय ने यह भी माना कि केवल चेक पर हस्ताक्षर और शेष इबारत अलग-अलग होने के आधार पर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि चेक का दुरुपयोग हुआ है। अभियुक्त द्वारा चेक के कथित दुरुपयोग के संबंध में परिवादी के विरुद्ध कोई स्वतंत्र कानूनी कार्रवाई किए जाने का प्रमाण भी रिकॉर्ड पर नहीं था।*
*बचाव पक्ष के गवाह के बयानों में विरोधाभास पाए जाने के कारण न्यायालय ने उसके कथनों को अविश्वसनीय मानाl*
*2020 से लंबित था मामला
न्यायालय ने सजा के प्रश्न पर कहा* कि मामला वर्ष 2020 से लंबित है तथा धारा 138 एनआई एक्ट का अपराध आर्थिक प्रकृति का है।न्यायालय ने अभियुक्त को परिवीक्षा का लाभ देने से इनकार करते हुए कहा कि चेक केमाध्यम से होने वाले आर्थिक लेन-देन *की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए ऐसे मामलों में उचित दण्ड आवश्यक है।*
*परिवादी की ओर से अधिवक्ता लक्ष्मीचंद मीणा ने की पैरवी*
*प्रकरण में परिवादी दिनेश कुमार* *की ओर से अधिवक्ता लक्ष्मीचंद मीणा ने पैरवी की। अभियुक्त की ओर से अधिवक्ता हेमेंद्र सिंह ने पक्ष रखा।*
*न्यायालय ने दिनांक 17 अगस्त 2026 को खुले न्यायालय में निर्णय सुनाते हुए अभियुक्त रामनारायण तेली को धारा 138 परक्राम्य लिखत अधिनियम के अपराध में दोषसिद्ध किया तथा उपरोक्त सजा एवं प्रतिकर की राशि अदा करने के आदेश दिए।*




