*प्रभु भक्ति से सारे संकट दूर हो जाते है ओर मन को शांति मिलती है**संगति हमेशा जांच परख कर सुशील, ज्ञानी जन से करनी चाहिए ,जिससे गलत राह पर न चलकर सही रास्ता मिल सके -प्रज्ञान सागर महाराज ।*

*केकड़ी 27जून (जन तंत्र तक अपडेट )*
*जल की एक बूँद यदि कीचड़ में गिरती है, तो वह बूँद कीचड़ बन जाती है ।*
*पानी की वही बूँद गन्ने के खेत में गिरती है तो मीठी बन जाती है, नीम की जड़ में गिरती है तो कड़वी बन जाती है, स्वाति नक्षत्र शिप में गिरने पर मोती व जिनेन्द्रदेव के सिर पर गिरती है तो गंधोधक बन जाती है ।*
*जैसी संगति करेंगे हम वैसे ही बन जाते हैं ।*
*संगति हमेशा जांच परख कर सुशील, ज्ञानी जन से करनी चाहिए ,जिससे गलत राह पर न चलकर सही रास्ता मिल सके ।*
*जिस प्रकार भोजन शरीर का पोषण करता है, उसी प्रकार संयम, जिनवाणी श्रवण व स्वाध्याय करने से धर्म कार्य का पोषण किया जा सकता है ।*
*अपने भीतर से अहंकार, ईर्ष्या क्रोध एवं राग द्वेष का त्याग करने पर आत्म शांति की अनुभूति प्राप्त कर सकते हैं एवं मोक्ष मार्ग की ओर आगे बढ़ सकते हैं ।*
*बोहरा कॉलोनी स्थित श्री नेमिनाथ जैन मंदिर में आचार्य श्री विनिश्चय सागर महाराज के शिष्य श्रवण मुनि प्रज्ञानसागर महाराज ने अपने प्रवचन के दौरान कहे।*
*संघस्थ मुनि प्रसिद्ध सागर महाराज ने भक्तामर स्तोत्र के माध्यम से जिनेंद्र प्रभु की आराधना स्वरूप बताया कि जीवन में अनेक* *परेशानी ,कष्ट पीड़ाएं आती है,लेकिन उस समय हमें प्रभु का स्मरण श्रद्धा भाव बनाए रखते हुए दृढ़ शक्ति को मजबूत रखना चाहिए ।*
*भगवान हमें कुछ देते नहीं है ,परंतु हम भक्ति के द्वारा सब कुछ पा लेते हैं।*
*कितना भी कष्ट आ जाने पर भी हमें प्रभु भक्ति में लीन रहना चाहिए ।*
*प्रभु भक्ति से सारे संकट दूर हो जाते है ओर मन को शांति मिलती है ।*
*मीडिया प्रभारी पारस जैन और रमेश बंसल ने बताया कि प्रतिदिन की भांति प्रातःजिनाभिषेक, शांति धारा जिनेंद्र अर्चना सहित सभी धार्मिक क्रियाएं मुनि ससंघ के सानिध्य में संपन्न हुई ।*
*श्री नेमिनाथ भगवान के प्रथम स्वर्ण कलश करने का सौभाग्य भागचंद ज्ञानचंद जैन कुमार विनय कुमार भगत परिवार ने प्राप्त किया।*
*प्रथम शांतिधारा करने का पुण्यार्जन विपिन कुमार नितिन कुमार पारा परिवार ने प्राप्त किया।*
*शाम को आरती,भक्ति ,शास्त्र सभा, स्वाध्याय सहित आनंद यात्रा मुनि संघ के सानिध्य में संपन्न हुई ।*






