*2 जुलाई को होगा नवीन रामद्वारा भवन का भव्य उद्घाटन महोत्सव, तैयारियों को लेकर सामाजिक संगठनों की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित*

*कलश यात्रा, शोभायात्रा एवं उद्घाटन समारोह को ऐतिहासिक बनाने के लिए विभिन्न समितियों का गठन*
*संत जगबल्लभराम भंडारी ने दिया सेवा, सत्संग और एकता का संदेश*
*केकड़ी सोमवार, 29 जून (जनतंत्र तक अपडेट )*
*केकड़ी में नवनिर्मित रामद्वारा भवन के बहुप्रतीक्षित भव्य उद्घाटन महोत्सव को ऐतिहासिक, सुव्यवस्थित एवं भव्य बनाने के उद्देश्य से सोमवार को रामस्नेही संत निवास भवन में रामद्वारा सेवा समिति, केकड़ी के तत्वावधान में विभिन्न सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता रामस्नेही संत जगबल्लभराम भंडारी महाराज ने की। बैठक में उद्घाटन समारोह, विशाल शोभायात्रा एवं कलश यात्रा की तैयारियों की विस्तृत समीक्षा करते हुए विभिन्न व्यवस्थाओं के लिए अलग-अलग समितियों का गठन कर जिम्मेदारियां सौंपी गईं।*
*रामद्वारा सेवा समिति के प्रमुख व्यवस्थापक रामगोपाल सैनी ने बताया कि 2 जुलाई को आयोजित होने वाले उद्घाटन समारोह एवं विशाल कलश यात्रा को सफल बनाने के लिए जल व्यवस्था, भोजन व्यवस्था, कलश पंजीयन, प्रसाद वितरण, यात्रा मार्ग प्रबंधन, स्वागत, सुरक्षा, यातायात नियंत्रण तथा अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं के लिए अलग-अलग समितियां गठित की गई हैं। प्रत्येक समिति को अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन पूरी निष्ठा एवं अनुशासन के साथ करने का आग्रह किया गया, ताकि आयोजन में आने वाले हजारों श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।*
*बैठक को संबोधित करते हुए पुष्कर से पधारे रामस्नेही संत जगबल्लभराम भंडारी महाराज ने रामद्वारा सेवा समिति एवं केकड़ी के सामाजिक संगठनों की मुक्तकंठ से सराहना की। उन्होंने कहा कि यह आयोजन केवल एक भवन के उद्घाटन का कार्यक्रम नहीं, बल्कि श्रद्धा, सेवा, समर्पण और सामाजिक एकता का महापर्व है। सभी संगठनों को मिलकर जिम्मेदारी, अनुशासन और सहयोग की भावना से इस आयोजन को सफल बनाना चाहिए।*
*अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में संत जगबल्लभराम भंडारी महाराज ने कहा कि लगभग 250 वर्ष पूर्व रामस्नेही संप्रदाय के प्रवर्तक संत शिरोमणि स्वामी रामचरण महाराज ने केकड़ी में खारे कुएं के समीप भजन, कीर्तन और साधना की थी।* *उसी आध्यात्मिक तप और भक्ति के प्रभाव से इस पावन रामद्वारा की महिमा स्थापित हुई। उन्होंने कहा कि किसी भी धार्मिक स्थल की वास्तविक पहचान उसके भव्य भवन से नहीं, बल्कि वहां होने वाले नियमित सत्संग, संकीर्तन, हरिनाम जप एवं आध्यात्मिक साधना से होती है।*
*उन्होंने कहा कि केवल पत्थर और चूने से बने भवन समाज का कल्याण नहीं कर सकते। जब तक किसी स्थान पर प्रतिदिन प्रभु नाम का स्मरण, सत्संग और आध्यात्मिक साधना नहीं होगी, तब तक उस स्थान की पूर्ण सार्थकता सिद्ध नहीं होती। इसलिए उद्घाटन के बाद भी रामद्वारा में नियमित रूप से भजन, कीर्तन और सत्संग की परंपरा निरंतर बनी रहनी चाहिए।*
*बैठक में विभिन्न सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी आयोजन को सफल बनाने के लिए अपने-अपने स्तर पर कलश यात्रा के स्वागत हेतु यात्रा मार्ग पर स्वागत द्वार लगा कर पुष्पवर्षा की जाएगी साथी अन्य व्यवस्थाओं में भी पूर्ण सहयोग देने का विश्वास दिलाया। बैठक में विश्व हिंदू परिषद से हीराचंद खूंटेटा, राजेंद्र फतेपुरिया, ओमप्रकाश सोनी, मुकेश शर्मा एवं हेमराज कच्छावा, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से सुभाषचंद भाल, यशवंत बैली, पुखराज तोषनीवाल एवं मुरारी अग्रवाल, बजरंग दल से रामावतार चौधरी, टोनी माली, कैलाश माली तथा भारत विकास परिषद से बहादुर सिंह शक्तावत, कैलाशचंद जैन, रामनिवास जैन, हीरालाल सामरिया, नंदकिशोर तिवाड़ी, किशन प्रकाश सोनी सहित विभिन्न सामाजिक संगठनों के अनेक पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।*
*बैठक के अंत में सभी उपस्थित संगठनों ने एक स्वर में संकल्प लिया कि 2 जुलाई को होने वाले नवीन रामद्वारा भवन के उद्घाटन महोत्सव, विशाल कलश यात्रा एवं शोभायात्रा को केकड़ी के इतिहास का यादगार धार्मिक आयोजन बनाया जाएगा।*













